HealthPhone™: What every health worker, family and community has a right to know

निम्नलिखित के लिये प्रमुख संदेशः
जन्म का समय तय करने के लियेसुरक्षित मातृत्व और नवजात का स्वास्थ्यवच्चे का विकास तथा शुरुआती सीखस्तनपान
पोषण और वृद्धिरोग प्रतिरक्षणअतिसार/दस्तसर्दी-ज़ुकाम तथा अधिक गंभीर बीमारियांसाफ-सफाई
मलेरियाएच.आई.वी.बाल सुरक्षाचोटों से बचावआपातस्थितिः तैयारी और प्रतिक्रिया

Download VideoDownload Hindi Video: 360p (.mp4)480p (.flv)720p (.mp4) 1440 x 810 720p (.mp4) 1280 x 720
Android: Behold IICliq / DEXTDroidEris / DesireG1HeroMagic / myTouchNexus One
Apple: iPadiPhoneiPod ClassiciPod NanoiPod Touch
Other: PSPTheora WebM

 


>> Winner <<

mBillionth award south asia 2011

Watch TEDx TalkWatch the TEDx Talk - HealthPhone™: The First Mile Now Reachable

Watch the Video in EnglishWatch the HealthPhone™ Video in English


HealthPhone™ wins mBillionth Award - Most Promising Nomination for 2011Watch HealthPhone™ win mBillionth Award
      - Most Promising Nomination for 2011




My People Perish For Lack Of Knowledge - Bible

 


Translated to Hindi by
Translators without borders


असुविधाजनक वास्तविकता यह है कि हम एक ऐसी दुनिया में जी रहे हैं, जहां पर हर रोज एक मौन आपात स्थिति हैः आज 22,000 बच्चे ऐसे कारणों से मर जाएंगे जिन्हें रोका जा सकता था। आज 1,000 औरतें गर्भावस्था संबंधी कारणों से मर जाएंगी। इस वर्ष, 4 मिलियन नवजात शिशु अपने जीवन के पहले माह में ही मर जाएंगे।

गरीबी, भुखमरी, आसानी से रोके जा सकने वाले रोग और बीमारियां व अन्य संबंधित कारण वे मौन हत्यारे हैं जो उनसे उनका जीवन छीन लेंगे। बच्चों की मृत्यु की संख्या का लगभग 90% केवल निम्न छः परिस्थितियों के कारण हैः जन्म संबंधी कारणों से, निमोनिया, डायरिया, मलेरिया, तथा एच.आई.वी/एड्स.

इन हत्यारों पर केन्द्रित अगर हजारों नहीं तो सैकड़ों बेहतरीन परियोजनाएं दुनिया के शहरी और ग्रामीण हिस्सों में लागू की जाती हैं। कुछ एक गांव के स्तर पर तो कुछ अन्य, गांवों के एक समूह, एक कस्बे, एक शहर, तालुका या ब्लॉक या जिले के स्तर पर कार्य करती हैं। कुछ परियोजनाएं तो प्रदेश के स्तर पर तथा कुछ राष्ट्रीय स्तर पर लागू की जाती हैं। ऐसा क्यों है? एक प्रमुख कारक क्षमता का विकास तथा स्केलिंग है।

माँ तथा बच्चे की मृत्युदर को हम रोक पाने में कतई सक्षम नही हो पा रहे थे, उसको कम करने में स्वास्थ्य शिक्षा सबसे अधिक प्रभावी तरीकों में से एक होगी। माँ, पिता, सहोदरों, सेवा करने वालों और समुदायों के व्यवहार तथा अभ्यासों में परिवर्तन के लिये उपयोगी सूचनाएं तथा संदेश देना हमारे लिये जरूरी हैः संदेश जो बच्चों के जीवन की रक्षा कर सकते हैं तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं और उनको उनकी पूरी क्षमता तक विकसित हो कर बढने में मदद कर सकते हैं।

अशिक्षित लोगों के लिये जानकारी का एक मात्र स्त्रोत संभवतः उनके आसपास के लोग हैं जो कई बार स्वयं भी अशिक्षित ही होते हैं। उनका दूसरों पर आश्रित होना, और स्वावलंबन, उनका अशक्त और बहिष्कृत होना, ऐसे गंभीर स्तर पर है, जिसके बारे में हममे से कई सोच भी नही सकते हैं।

जनसंख्या में लगातार तेज वृद्धि और घटते बजटों के साथ, सरकारों के लिये कार्यक्रमों और प्रयासों को प्रभावी ढ़ंग से लागू करने हेतु अपने विभागों और कर्मचारियों की विशाल संख्या को प्रशिक्षित तथा शिक्षित करना काफी कठिन और खर्चीला होता जा रहा है। इस कारण स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से परिवारों और समुदायों को रोगों की रोकथाम और स्वास्थ्य की गुणवत्ता को बेहतर करने के लिये जरूरी मूल ज्ञान नहीं मिल पाता है। ज्ञान के इस प्रवाह को बनाए रखने में सहायक इन संसाधनों को जितना अधिक मुक्त रखा जाएगा उतना ही अधिक बेहतर होगा।

यात्रा का पहला पड़ाव पार करने योग्य हैः

मोबाइल फोन ने इस तरह से संपर्कों को संभव कर दिया जाता है जिनके बारे में अभी हाल के समय तक सोचा भी नही जा सकता था। उदाहरण के लिये भारत को ही ले लीजियेः 1.17 बिलियन की जनसंख्या में 700 मिलियन(अक्टूबर 2010 तक) वायरलेस फोन इस्तेमाल करने वालों की संख्या है, जो कि 15 से 20 मिलियन प्रतिमाह की दर से बढ रही है। हाल ही के एक अध्ययन के अनुसार "2014 तक मोबाइल फोन की ये पहुंच 97 प्रतिशत तक हो जाएगी"।

क्षमता-विकास तथा स्केलिंग के लिये यह पूरा का पूरा परिदृष्य बदलने वाला माध्यम साबित होगा। इसका तात्पर्य यह है कि हम छूट गये लोगों, निरक्षरों, उन सभी औरतों और बच्चों तक पहुंच पाएंगे जो केवल दर्द भरे आंकड़ों में ही दिखते हैं। हम परिवारों तथा समुदायों तक पूरी पहुंच बना सकते हैं - एक ऐसा काम जिसे हम पहले कभी नहीं कर सके।

सशक्तीकरण, शिक्षण, पहुंच तथा बदलते व्यवहार

यदि तस्वीर का महत्व सौ शब्दों का है, तो वीडियो का महत्व दस लाख शब्दों का होता है

मोबाइल फोनों को अनेक व्यवस्थाओं में संदेश भेजने में इस्तेमाल करने के लिये कई सफल परियोजनाओं का विकास किया गया है, जैसे - जांच के लिये लोगों को स्वास्थ्य केन्द्र तक आने को प्रोत्साहित करने के लिये, दवा लेना याद दिलाने के लिये तथा सार्वजनिक स्वास्थ्य अभियान - स्वास्थ्यफोन समय में आगे की ओर नवीनता भरी एक छलांग है। स्वास्थ्यफोन, परिवारों को उनका व्यक्तिगत लाइब्रेरी संदर्भ और बेहतर स्वास्थ्य अभ्यासों के लिये उपयुक्त समय में, सही लोगों को, जरूरत के समय, वो भी सीधे उन तक और तब जबकि कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या उत्पन्न होने वाली हो मार्गदर्शन उपलब्ध कराते हैं।

डायरिया
जब किसी बच्चे को डायरिया हो, तो साधारण ओरल रीहिड्रेशन सोल्यूशन(ओ.आर.एस) को कैसे मिलाएं, इस जानकारी की एक वीडियो क्लिप बच्चे के जीवन और मृत्यु में अंतर पैदा कर सकती है। डायरिया हर साल लगभग 1.5 मिलियन बच्चों को मारता है। डायरिया के लिये सस्ता तथा प्रभावी इलाज उपलब्ध है, लेकिन विकासशील देशों में डायरिया से पीड़ित केवल 39 प्रतिशत बच्चे ही अनुशंसित इलाज प्राप्त कर पाते हैं। ओ.आर.एस. के प्रयोग ने डायरिया के कारण उत्पन्न निर्जलीकरण से हुई मृत्यु में लाखों की कमी को दर्शाया है।

मलेरिया
जब मलेरिया का मौसम आता है तो, मच्छरदानी के प्रयोग और बुखार से किस प्रकार निपटें, इसके बारे में बनी वीडियो क्लिप, बच्चों की मृत्यु और गर्भवती महिलाओं पैदा होने वाली जटिलताओं की रोकथाम में सहायता कर सकती है। अफ्रीका में पांच साल की उम्र से कम के बच्चों की हर साल एक मिलियन मृत्यु होती हैं, जिन्हें मच्छरदानी के उपयोग, उपयुक्त निदान और बुखार के उपचार से रोका जा सकता है। वास्तव में, अफ्रीका में मच्छर के काटने के कारण होने वाले मलेरिया संक्रमण के कारण हर 30 सेकेन्ड में एक बच्चे की मृत्यु हो जाती है।

निमोनिया
जब जिद्दी सर्दी और ज़ुकाम बच्चे की नींद में बाधा पैदा कर रही है तो, किस चीज की जांच करें, कैसे इलाज करें और ये सुनिश्चित करने के लिये कि निमोनिया की गंभीर समस्या न पैदा हो वीडियो की क्लिप और ऑडियो सूचना, मार्गदर्शन करेगी। हर साल पांच साल से कम उम्र के बच्चों की 1.8 मिलियन मृत्यु के कारण निमोनिया दुनिया में बच्चों की मृत्यु का सबसे बड़ा कारण है, इनमें से 98 प्रतिशत से अधिक मृत्यु 68 विकासशील देशों में होती है। खांसी की शुरुआत में ही अगर रोकथाम कर ली जाए तो बच्चों में निमोनिया के मामलों को कम किया जा सकता है, जिससे हर साल हो रही लाखों मौतों से बचा जा सकता है।

कम कीमत वाले मोबाइल फोनो में पहले से डाली गयी सूचनाएं

यूनीसेफ, डब्लू.एच.ओ., यूनेस्को, यू.एन.एफ.पी.ओ., यू.एन.डी.पी., यू.एन.एड्स, डब्लू.एफ.पी और वर्ल्ड बैंक के द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किये गये ज्ञान के आधार पर हेल्थफोन के स्वास्थ्य और पोषण की पाठ सामग्री को लिखा गया गया है। जन्म के समय को तय करने, सुरक्षित मातृत्व और नवजात के स्वास्थ्य, बाल विकास और आरंभिक जानकारी, स्तनपान, पोषण और विकास, रोग प्रतिरक्षण, डायरिया, सर्दी-ज़ुकाम व अधिक गंभीर बीमारियां, साफ-सफाई, मलेरिया, एच.आई.वी., बाल-रक्षण, चोटों से बचाव, इमरजेंसीः तैयारी और प्रतिक्रिया जैसे मुख्य चिंता के क्षेत्रों को संबोधित करता है। इस पाठ को, प्रसिद्ध मोबाइल फोनो के कम कीमत वाले मॉडलों में पहले से ही भर दिया जाएगा - न किसी सिग्नल की जरूरत होगी और न ही वीडियो या अन्य मीडिया को डाउनलोड करने की कीमत लगेगी। प्रयोग करने वालों को अपनी जरूरत के अनुसार चुनना होगा कि वह कब और क्या सुनना या देखना चाहते हैं।

पायलट पाठ अंग्रेजी तथा अन्य 15 भारतीय भाषाओं में: हिन्दी, असमी, बंगाली, गुजराती, कन्नड़, कोंकणी, मलयालम, मराठी, उड़िया, पंजाबी, राजस्थानी, संस्कृत, तमिल, तेलगू और उर्दू

स्वास्थ्यफोन बहुत जल्दी आपके नजदीकी गांव, कस्बे, शहर, झोपड़-पट्टी, ब्लॉक, जिले, प्रदेश व प्रांत में आ रहा है!



 

गरीब देशों में बच्चों की मृत्यु-दर को कम करनाः जानकार माता-पिता की शक्ति download pdf
पीटर बूने और झाओगुओ खान - एल.एस.ई.शोध प्रयोगशाला(आर.लैब)

'पिछले सौ सालों में दुनिया की जनसंख्या का स्वास्थ्य, मानव के पिछले संपूर्ण प्राकृतिक इतिहास से कहीं अधिक बेहतर हुआ है। पूरी दुनिया की औसत आयु जो सन् 1900 में केवल 31 वर्ष थी, सन् 2000 में बढ़कर 66 वर्ष हो गयी।' (मैडिसन, 2001)

'क्यों कुछ गरीब देशों में 20% बच्चों की मृत्यु हो जाती है, जबकि दूसरों में केवल 2% की मृत्यु होती है? कम आय वाले 45 देशों के 2,78,000 बच्चों पर आधारित सर्वेक्षण डाटा के इस्तेमाल करते हुए, हमने इस सवाल की जांच की। हमने ये पाया कि बच्चे की उत्तरजीविता को समझने में माता-पिता की शिक्षा और माँ की आधुनिक स्वास्थ्य सेवा की जानकारी प्राप्त करने की प्रवृत्ति, अनुभव के लिहाज से अधिक महत्वपूर्ण है, जबकि आम बीमारियों का प्रचलन तथा पानी व साफ-सफाई जैसी मूलभूत सुविधाएं उतना मायने नही रखती हैं। हमारे द्वारा निर्मित उपचार की सेवाओं के लिये गिनी के गुणांक का इस्तेमाल करते हुए हमने पाया कि सार्वजनिक तथा निजी स्वास्थ्य प्रणालियां 'समान रूप से असमान हैं', अर्थात दोनो ही बेहतर पारिवारिक परिस्थितियों में रह रहे बच्चों का समर्थन करती हैं, और इनमें से कोई भी बेहद गरीब समुदायों में परिणामों को सुधारने में एक-दूसरे से बेहतर नही दिखती हैं।यह तथ्य इस सामान्य धारणा के ठीक विपरीत है कि बच्चों की मृत्युदर को कम करने के लिये एक विस्तृत सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र आवश्यक है। जबकि, हमारा यह मानना है कि अवलोकन पर आधारित साक्ष्य बच्चे के स्वास्थ्य में माता-पिता की एडवोकेट के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका की ओर इशारा करते हैं। अगर हम माता-पिता को बेहतर स्वास्थ्य ज्ञान और सामान्य शिक्षा दे सकें तो एक निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र, मांग को पूरा करने में उठ खड़ा हो सकता है। हम इस बारे में साक्ष्य दे सकते हैं कि कम मृत्युदर का ये वैकल्पिक रास्ता कई देशों जैसे वियतनाम, इंडोनीशिया, इजिप्ट, और भारत के केरल प्रदेश में बच्चों में कम मृत्यु की वर्तमान सफलता का कारण हैँ। अंत में हम उन पहलों के पैकेज की गणना करते हैं जो शिक्षा, स्वास्थ्य ज्ञान और इलाज प्राप्त करने की इच्छा को लक्ष्य बनाकर बच्चों की मृत्युदर को 32% तक कम कर सकेगा।'

"बीमार बच्चों की सहायता करने के लिये माता-पिता द्वारा किये गये कार्य, वे सबसे महत्वपूर्ण कारक हैं जो देशों में बच्चों की उत्तरजीविता के अंतर को निर्धारित करते हैं।"



 

© 2011 The Mother and Child Health and Education Trust • Hong Kong registered charity no 91/10374 •